Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 179, Verses 7–8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 179, verses 7–8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 179 · श्लोक 7,8
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मव्योम्नः स्वप्नरूपस्वभावत्वाज्जगत्स्थितेः ।
इदं सर्वं संभवति सहेतुकमहेतुकम् ॥ ७ ॥
न कारणं विना कार्यं भवतीत्युपपद्यते ।
यद्यथा येन निर्णीतं तत्तथा तेन लक्ष्यते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कहा जाय कि जीवरूप चिदाभास ही प्राणवायु का क्षोभ पैदा करेगा, तो उस पर कहते है ।
जैसे बोझ ढोनेवाला बोझ को ढोता है, परिचालित करता है, वैसे ही अमूर्त चिदाभास समूर्त प्राण
आदि देहपर्यन्त इस भार को परिचालित केसे कर सकता है ? यदि अमूर्तं संवेदनमात्र चिदाभास प्राणादि
देहान्त मूर्त पदार्थ को व्याप्त कर संचालित कर सकता है, तो पुरुष के केवल संकल्प संवित् से पर्वत
क्यों नहीं चलता ?