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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

खवातेऽन्तर्मृतप्राणाः प्राणानामन्तरे मनः । मनसोऽन्तर्जगद्विद्धि तिले तैलमिव स्थितम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश में विद्यमान वायु के भीतर मृत प्राणियों के प्राण, उन प्राणों में उनका मन और उसी मन में जगत्‌ को हे श्रीरामजी आप ऐसे स्थित जानिये, जैसे तिल में तैल स्थित रहता है