Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अत्रैते पश्य पश्यामि संकल्पजगताङ्गणे ।
बुद्धिदृष्ट्या समुह्यन्ते पुरो मन्दरमेरवः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ मैं देख रहा हूँ कि इस
संकल्प कल्पित आँगन में मेरे सामने ये अनेक मन्दराचल और सुमेरु पर्वत उड़ रहे हैं । हे
श्रीरामजी, आप भी अपनी बुद्धिदृष्टि से देखिये