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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

सप्राणवातैः पवनैः स्फुरत्संकल्पगर्भितैः । सर्वा एव दिशः पूर्णाः पश्यामीमाः समन्ततः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

स्फुरित हो रहे संकल्पो से परिपूर्ण प्राणवायु के सहित पवनों से इन सब दिशाओं को मैं चारों ओर से परिपूर्ण देख रहा हूँ