Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
या योदेति विकल्पश्रीरप्रबुद्धाशयं प्रति ।
सर्वगत्वादनन्तत्वाच्चिद्व्योम्नः सा न सन्मयी ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानी के हृदय में जो-जो विकल्पश्री उदित होती है वह
सब चिदाकाश के सर्वगामी और अनन्त होने से सद्रूप नहीं है