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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

यथोदेति विकल्पश्रीः प्रबुद्धे नोदितैव सा । सर्वगत्वादनन्तत्वाच्चिद्व्योम्नः सा न सन्मयी ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

अज्ञानी में जिस तरह विकल्पश्री उदित होती है उस तरह प्रबुद्ध में वह उदित नहीं होती, यह निश्चित है । चिदाकाश के सर्वव्यापक तथा देश, काल और वस्तुकृत परिच्छेद से शून्य होने के कारण वह सद्रूप नहीं है