Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 181, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
मुहूर्तमात्रेणोवाच प्रबुध्य ध्यानतो मुनिः ।
श्रूयतामिदमाश्चर्यमार्यौ हि कार्यवेदिनौ ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने कहा : हे साधो, जब तक तुम अपना इच्छित वर प्राप्त नहीं कर लेते तब तक तुम्हारी
रक्षा और परिचर्या के लिए मैं यहीं रहूँगा