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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 181, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

इति श्रुत्वा स भगवान्पुनर्ध्यानमयोऽभवत् । ददर्शोदन्तमखिलमस्माकं स्वात्मनस्तथा ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके इतना कहने पर मैंने उससे जो कहा सो सुनिये, क्योकि आश्चर्य वृत्तान्त सुनने में किसी धीमान्‌ का चित्त खिन्न नहीं होता