Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 181, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
कह्लारकीर्णकुमुदोत्पलपद्मखण्डवल्गच्चकोरबककोककदम्बहंसम् ।
तालीसगुग्गुलकचन्दनपारिभद्रभद्रद्रुमोदरविहारिविचित्रशक्ति ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
यह स्वीकार कर लेने पर उस पुरुष के वेधे पैरों को मैंने वृक्ष से
इस प्रकार मुक्त किया जैसे आलान से (बन्धनस्तम्भ से) हाथी के बच्चे के पैरों को मुक्त करते
हैं