Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 181, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
नीतवन्तौ निशामावां कदलीकानने घने ।
तुषारशिशिरे श्रान्तौ कदलीदलतल्पके ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्राह्मण ने कहा : हे
महाभाग, यह ठीक है, कि मैं किसी विशेष अर्थ के लिए महाप्रयत्नशील हूँ, मैं यहाँ जिसलिए आया हूँ
उसका निर्णय सुनिये