Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 181, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
प्राप्तावावां तृतीयेऽह्नि षण्डषण्डकमण्डितम् ।
जङ्गलं जनविच्छेदविभक्तं खमिवाकृतम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस पृथिवीम, आकाश में स्थित स्वर्ग के प्रतिबिम्ब की तरह, वैदेह नाम का
सर्वसौभाग्यं से युक्त देश है