Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 181, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तत्र स प्रकृतं मार्ग परित्यज्य वनान्तरम् ।
प्रविशन्समुवाचेदमकार्यकरणं वचः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी वैदेह देश में ब्राह्मणवंश में मैं उत्पनन हुआ और विद्या प्राप्त
करके स्थित रहा । कुन्दपुष्प की तरह चमकीले दाँत होने से कुन्ददन्त नाम से मेरी प्रसिद्धि हुई