Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 182, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 182 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
एतेऽष्टौ भ्रातरस्तत्र तापसा देहसंक्षये ।
सप्तद्वीपेश्वराः सर्वे भविष्यन्ति गृहोदरे ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उस वृद्ध तपस्वी के यह कहने पर मैंने भी कहा : भगवन्, यह सब हम कुछ नहीं
जानते इसलिए आप ही जानें । आप सर्वज्ञ होते हुए योग-बल से यह सब स्वयं क्यो नहीं जान
लेते