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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 182, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 182 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

अष्टौ ह्येते महीपीठेष्वेतेष्वेतेषु सद्मसु । सप्तद्वीपेश्वरा भूपा भविष्यन्तीह मे शृणु ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

यह सुनकर वह भगवान तपस्वी फिर ध्यान में मग्न हो गये । समाधि द्वारा उन्होने हमारा ओर अपना सारा वृत्तान्त जान लिया