Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 182, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 182 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अस्त्येतेषां किलाष्टानां भार्याष्टकमनिन्दितम् ।
दिगन्तराणां नियतं ताराष्टकमिवोज्ज्वलम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
एक मुहूर्त में ध्यान से जागकर मुनि ने कहा :
हे कार्यज्ञ आर्यो, आप लोग आश्चर्यभूत इस वृत्तान्त को सुनें