Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 182, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 182 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
अदृश्योवाच सा तासां वचोऽन्तःपुरमन्दिरे ।
देवी सपर्यावसरे प्रत्येकं पृथगीश्वरी ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
उनके यहाँ रहने के कारण यहाँ विशाल निबिड जंगल हो गया,
यह पुष्पप्रधान ऋतुओं से विभूषित वन गौरीवन के नाम से विख्यात हुआ