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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

वरा वदिष्यन्ति । सुदूरं गम्यतां शापाः कालोऽस्माकमुपागतः । क्रतूनामिव तन्नाम कः समर्थोऽतिवर्तितुम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे देवि, हमारी सप्तद्रीपेश्वरता की स्थिति के समय प्रजाभूत सब लोग झूठे व्यवहार का परित्याग कर दें यानी सच्चे रहे, ये सब आश्रमवारी लोग भी स्वस्वधर्मनिरत रहे तथा सभी सप्तद्वीप निवासी अपने अपने आश्रमधर्म ओर वर्णधर्म में रत रहें