Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
वरा वदिष्यन्ति ।
कृता भवन्तो मुनिना वयं दिनकृता कृताः ।
मुनीनां चाधिको देवो भगवन्तं पुरा यतः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
वह भगवती इष्टदेवी उनके
इच्छित अर्थ को, आदरपूर्वक स्वीकार कर तथा उनसे "एवमस्तु" कहकर अन्तधनि को प्राप्त हो
गयी