Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
ते परस्परमन्विष्य स्वयं हृदयसारताम् ।
ज्ञात्वा च समवायेन प्रवक्ष्यन्ति पितामहम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
ये आठ भाई इन्हीं घरों में इन्हीं महासिंहासनों
पर सप्तद्रीपाधिपति राजा होंगे यह मुझसे सुनिये