Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
इति श्रुत्वा प्रविष्टास्ते सारतां समवेक्षितुम् ।
वराणां हृदयं शापाः शापानां हृदयं वराः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
ये आठ तपस्वी भाई देह-नाश होने पर वहाँ
घर के अन्दर ही सब सप्तद्वीप के अधिपति होगे