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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मोवाच । वरशापाधिपा भो भो येऽन्तःसारा जयन्ति ते । केऽन्तःसारा इति मिथो नूनमन्विष्यतां स्वयम् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

कदम्बतपस्वी ने कहा : हे सज्जनो, इन लोगों के सम्बन्ध में यही केवल असंबद्ध वृत्तान्त है यह बात नहीं है यह दूसरा वृत्त भी अधिक असंबद्ध मैं कहता हूँ, उसे आप लोग मुझसे सुनें