Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
शिक्षितं त्वत्त एवेति यत्तदेव तव प्रभो ।
पुनः प्रतीपं पठितं शीघ्रं यामो नमोऽस्तु ते ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
देवीजी ने कहा : हे पत्रि, एेसा ही
हो, (उस मूर्खा को उत्तम वर याचना में अकुशल देखकर देवी स्वयं दूसरा वर देती है) ओर पति
का देहान्त होने पर सप्तद्रीपाधिपत्य में स्थित होने पर तुम उसकी प्रिय भार्या होओगी इसमें तनिक
भी सन्देह नहीं है