Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 184, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अविद्यमानमेवेदं दृश्यतेऽथानुभूयते ।
जगत्स्वप्न इवाशेषं सरुद्रोपेन्द्रपद्मजम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
शाप
कहेंगे : हे प्रजापते, चूंकि हम लोग अन्तःसारवान् नहीं हैं इसलिए हम ही वरों द्वारा जीते गये हे । वज्रस्तम्भों
के समान अचल वर ही अन्तःसारवान् हैं