Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 184, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
न स्वभावा न चैवार्थाः सन्ति सर्वात्मकोचिते ।
सर्गादौ कचितं रूपं यद्यथा तत्तथा स्थितम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त क्रमशः वे आठों भाई घर पर मरेंगे। तब
उनके बन्धु बान्धव उनके शरीरों को उनके द्वारा आहत अग्निय में दाह से संस्कृत करेंगे