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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 184, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

न च नाम परं रूपं कचनाकचनात्मकम् । द्रव्यात्मा चिच्च चिद्व्योम स्थितमित्थं हि केवलम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

पृथक्‌ पृथक्‌ स्थित उनके वे जीव जड़ों की नाई मुहूर्तभर सुषुप्ति में स्थित रहेंगे