Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 187, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 72
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हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार संकल्पनगर में
शिलानृत्य भी सत्य होता है उसी प्रकार ब्रह्मा के अधिकाररूप प्रारब्ध को भोगने के लिए अभीष्ट
संकल्पनगररूप यह जगत् भी सत्य है