Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verses 83–84
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 187, verses 83–84 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 83
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हिन्दी अर्थ
इस शरीर में मृतावस्था जिस तरह मनोबुद्धि आदि रहित ही अनुभूत होती है,
पत्थर आदि में जड़ सत्ता जैसी है वैसी ही परमात्मा की भी मनोबुद्धि आदि रहित निर्विक्षेप सत्ता
समझनी चाहिए