Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 188, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 188, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 188 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
नास्तमेति न चोदेति जगत्यामोक्षसंविदः ।
चतुर्दशविधस्यैका भूतसर्गस्य चित्तभूः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाश में निराकार चित्तता का जो स्वाभाविक स्फुरण हे,
वह बाह्यपदार्थदर्शन, आन्तरिक पदार्थ मनन, देश, काल, क्रिया आदि है