Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 188, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 188, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 188 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अत्र संसारलक्षाणि भविष्यन्ति भवन्ति च ।
भूतानि च फलानीव यथा कालव्यवस्थया ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पदार्थ जिस काल
में जैसा चित् से स्फुरित है जिसकी उसी ने वैसी कल्पना कर रक्खी है वह नियति भी आकाशरूप ही हे,
उससे अन्य नहीं है