Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 189, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
शब्दान्करोति संकेतं संज्ञाश्च स्पन्दनानि च ।
ओमित्युक्ते ततो वेदाञ्छब्दराशीन्प्रगायति ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह चित्तमय शरीर अन्दर ओर बाहर जगतों
को वैसे ही धारण करता है जैसे कि दर्पण प्रतिबिम्बो को धारण करता है