Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 189, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तैरेव कल्पयत्याशु व्यवहारमितस्ततः ।
मनो ह्यसौ कल्पयति यच्चेतति तदेव हि ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जब महाकल्प में प्राकृत
प्रलय के अन्तिम क्षण में सर्वनाश स्थिर हो जाता हे, उस समय महाशून्यपद अवकाशदायक प्रोढ
निरामय (निर्विकार) ब्रह्मात्मा शेष रहता हे