Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 189, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
आधिभौतिकता नास्ति काचित्किंचिदपि क्वचित् ।
आतिवाहिकतैवैनामभ्यासाद्याति भावनाम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई भाग
सनातन, सनक, सनन्दन आदि कहा गया हे, कोई भाग ईश्वर के नाम से प्रख्यात है, कोई भाग प्रजापति
कहा गया है