Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 189, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मूलादेवैवमायातो मिथ्यानुभवनात्मकः ।
मोहो ब्रह्मण एवायमित्यस्त्येष महात्मनाम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस जिस भाग में पाँच स्वेन्द्रियसंवितों का काकतालीयवत् भान हुआ वहाँ वहाँ
उन इन्द्रियों के विषय वैसे ही व्यवस्थित हुए