Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
एवंरूपो बुध्यमानः प्रोच्छूनत्वमथात्मनि ।
पश्यत्याशु स्वमात्मानं चन्द्रबिम्बमिव द्रुतम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर इस तरह का जाना गया उक्त चेतन अपने
स्वरूप में तत्काल स्थूलरूपता का (पंचीकरण से स्थूलता सम्पादन कर स्थूल समष्टि विराट्रूप
होकर स्थूलरूपता का) अनुभव करता है ओर उसमें अपने समष्ट्यात्मक द्रवस्वभाव मन को
चन्द्रबिम्ब के सदुश समञ्जने लग जाता है, यही उसकी बुद्धिसमष्टिरूप ब्रह्मरूपता है