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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

अङ्गानि राम तस्याष्टौ मनःषष्ठानि पञ्च च । साहंभावानीन्द्रियाणि भावाभावमयानि च ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, मूर्तं एवं अमूर्तस्वरूप पंचज्ञानेन्द्रिय, कर्मेन्द्रियसहित प्राण, षष्टेन्द्रिय मन और अहंकार ये आठ उस पुरुष के अंग हैं