Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
एवं विराट्सहस्राणि महाकल्पशतानि च ।
गतान्यथ भविष्यन्ति नानाचाराणि सन्ति च ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस तरह नानाविध आचारों से युक्त असंख्य विराट् के शरीर तथा
असंख्य महाकल्प बीत चुके हैं, आगे चलकर होंगे और इस समय हैं भी