Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
तान्येव देहिदेहेषु जीवा जीवन्ति जीविषु ।
मनो भूत्वा विचेष्टन्ते कर्म जन्मसु कारणम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
वे ही जीवित प्राणियों के
शरीरों में जीव होकर जीते हैं और मन हो करके अनेक जन्मों के कारणभूत कर्म किया करते
हैं