Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
विराड्जीवाच्चन्द्रमसो जीवभूतानि देहिनाम् ।
प्रसरन्त्यन्नजातानि प्रालेयविसरात्मना ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्ररूपी विराट् जीव से व्यष्टि जीव का प्रसार जो पहले कहा गया है उस्रका उपपादन
करते हैं।
चन्द्रमारूपी विराट्जीव से प्राणियों के जीवन के साधनभूत अन्न आदि सब पदार्थ, जो
औषधियों में चन्द्रकलाओं के प्रसाररूप हैं, सर्वत्र प्रसृत होते हैं