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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

स चेतति यथा यत्र यद्यदाशु तदेव हि । तथा तत्र तदा राम भवत्यनुभवात्मकम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, अतएव समष्टिजीव जहाँ पर जिस रूप से संकल्प करता है, वहाँ पर उस रूप का हो जाता है, क्योंकि समष्टिजीव जो संकल्प करता है, वह सत्य ही होता है और व्यष्टिजीव जैसा रहता है, वैसा ही संकल्प करता हे