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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 190, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 190, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 190 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । जगत्सूक्ष्मेण रूपेण महाप्रलय आगते । आस्ते ब्रह्मणि तत्तस्मात्पुनरेव प्रवर्तते ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर कुछ भी आधिभोतिकता नहीं है । आतिवाहिकता ही अभ्यासवश इस आधिभौतिक भावाना को प्राप्त होती है