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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 190, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 190, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 190 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । महाप्रलयपर्यन्ते केन सर्गास्तितानघ । अनुभूता महाबुद्धे तत्रस्था सा च कीदृशी ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

मूलभूत सर्जनहार ब्रह्मा से ही इस प्रकार का यह मिथ्या अनुभवरूप महान्‌ मोह आया है, इसलिए यह जगत्दर्शन भ्रम जब तक प्रारब्ध का क्षय नहीं होता तब तक तत्त्वज्ञो में भी रहता ही है