Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
न स्वप्नोसंभवाद्दृश्यं केवलं ब्रह्म भासते ।
चिन्मात्रव्योमसर्गादावित्थं कचकचायते ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिश्रेष्ठ, महाप्रलय होने पर जगत् सूक्ष्मरूप से ब्रह्म में रहता है, वह
उससे फिर उत्पन्न होता हे । भाव यह कि जैसे सांख्यो के अभिमत गुणों में सूक्ष्मरूप से जगत् रहता है
वैसे ही ब्रह्म में सूक्ष्मरूप से जगत् रहे