Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यत्स्वमेव वपुर्वेत्ति जगदित्यजगन्मयम् ।
चिन्मात्रव्योमसर्गादावित्थं भाति विकासनम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : हे अनघ, महाप्रलय पर्यन्त उस ब्रह्म में स्थित इस सर्ग की सत्ता का कौन
अनुभव करता है और हे महाबुद्धे, वह सत्ता कैसी है ?