Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
यदिदं जगदित्येव शून्यत्वाम्बरयोरिव ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : उस ब्रह्म में स्थित ज्ञप्तिरूपा सत्ता का तो ज्ञानियों से अनुभव होता है और
वह स्वयंप्रकाश चिद्रूपअभिन्न सत्ता ही उस समय रहती है मायाकाशरूपा नहीं रहती, क्योकि
मायाकाशरूप तो असत् जगत्सत्ता को कैसे प्राप्त हो सकता है ?