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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

बुद्ध्वा च यावत्स्वनुभूतियुक्तं स्थातव्यमेतेन विकल्पमुक्तम् । पाषाणमौनं कुजनेन तूक्तं न ग्राह्यमज्ञेन हि भुक्तमुक्तम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

वसिष्ठजी ने कहा : हे महाबाहो, यदि इस प्रकार चिद्रूप ही जगत्‌ की सत्ता मानोगो तो ज्ञप्ति (चिद्रूप) ही यह तीनों लोक हैँ । फिर विशुद्ध ज्ञानस्वरूप आत्मा के जन्म, मरण आदि कैसे हो सकते हैँ २