Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 25

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, द्रष्टा दृश्यत्व को नहीं प्राप्त होता क्योकि दृश्य का सर्वथा असम्भव है, इसलिए केवल द्रष्टा ही सर्वात्मा एक घनाकृतिरूप से भासमान होता है अतः कोई असामंजस्य नहीं प्रत्युत सब असामंजस्यों की निवृत्ति ही हो जाती है