Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 28
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : गुरुवर, यदि चेतन की नित्यमुक्तता है तो यह अहन्ता आदि चेत्य कहाँ
से ओर कैसे है ? यह जगत् वेदन कैसे तथा स्पन्द आदि का ज्ञान कैसे है ? शंका का तात्पर्य यह
है कि यदि नित्यमुक्तता है तो अहन्ता का प्रतिभास ही कदापि न होगा । इस तरह गुरु, शास्त्र आदि
की निष्फलता होगी