Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 61
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स रघुवर,केवल भ्रममात्रस्वरूप यह दुश्यचक्र (संसारचक्र) यथार्थ
तत्त्वज्ञान से स्थूलाकारता से विमुक्त हो जाता है यानी जले हुए वस्त्र के समान इसका केवल ढाँचा ही
शेष रह जाता हे । अवशिष्ट प्रारब्ध के भोग के क्रम से उसका भी विनाश हो जाता हे