Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 67
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हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, चित् का जो विषयों की ओर झुकना है वही चित्त कहलाता है। इस
समय मेरे सामने आपसे किया जा रहा महारामायण श्रवण ही इसका विचार है। इससे वासना निवृत्तहो
जाती है