Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 66
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, चित्त कैसा है ? कैसे उसका विचार किया जाता है ? उक्त चित्त
का भलीभाँति विचार करने पर क्या होता है ? यह मुझसे कहने की कृपा कीजिये